Hyperloop टेक्नोलॉजी क्या है? | What is Hyperloop Technology in Hindi?

आज के समय में अगर आपको तेज़ गति से ट्रेवल करना है तो आप हवाई जहाज का सहारा ले सकते हो जो की करीब 600km/hr की गति से उड़ता है. यह तो बात हुई हवा में उड़ने वाले वाहन की लेकिन धरती पर चलने वाले वाहनों में से सबसे तेज़ गति से Maglev Train दौड़ता है इसकी गति करीब 600 km/hr तक रहती है. लेकिन अब एक ऐसी टेक्नोलॉजी का निर्माण हो रहा है जिसकी गति हवाई जहाज और मैग्लेव ट्रैन से भी कई ज्यादा अधिक होगा और उस टेक्नॉलजी का नाम है Hyperloop Technology यह एक ग्राउंड ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी है. आप इस आर्टिकल में जानेंगे की Hyperloop टेक्नोलॉजी क्या है (What is Hyperloop Technology in Hindi) और यह कैसे काम करता है.

Hyperloop Technology क्या है? (What is Hyperloop Technology in Hindi)

Hyperloop एक ग्राउंड ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी है, इस Technology में एक Low Pressure Tube को खंभों के ऊपर बिछाया जाता है और इस Tube के अंदर बुलेट जैसा दिखने वाला बोगी मौजूद रहता है इस बोगी को Pod भी कहा जाता है जो की हवा में तैरते हुए चलता है.

इसी Pod में पैसेंजर को बैठाकर उनके गंतव्य तक 1200km/hr की रफ़्तार से पहुँचाया जा सकता है (Fastest Train in the World). आप Hyperloop को एक ट्रैन भी कह सकते हो जिसमे एक Tube के अंदर Pod काफी तेज़ गति से दौड़ता है.

इस तकनीक का विचार साल 2013 में सबसे पहले Elon Musk ने दुनिया को बताया था. Tube और Pod को मिलाकर Hyperloop टेक्नोलॉजी बनता है जिसमे Tube के अंदर से 90% हवा बाहर निकाल लिया जाता है और Pod को Tube के अंदर पटरी पर बिना संपर्क के काफी तेज़ रफ़्तार से चलाया जाता है.

Hyperloop Technology के तीन मुख्य अंग हैं Tube, Pod, और Solar Panel 

1. Tube 

यह सेक्शन Hyperloop का बाहरी हिस्सा होता है इसी Tube के अंदर Pod काफी तेज़ गति से ट्रेवल करता है. इस Tube के अंदर मौजूद पटरी का हिस्सा पूर्ण रूप से मैगनेट अर्थात चुम्बक से बना हुआ होता है और उसी तरह Pod के निचे का हिस्सा मैगनेट से बना होता है जिससे Pod, Tube के अंदर हवा में ही रहता है और Tube के पटरी को टच नहीं करता है.

अगर Tube के पटरी का हिस्सा North पोल है और Pod के निचे का हिस्सा भी North पोल है तो वह Pod, Tube को बिना टच किए ही तज रफ़्तार से दौड़ेगा. Tube के अंदर के हवा को बाहर निकालकर उसे वैक्यूम बना दिया जाता है (पूर्ण रूप से वैक्यूम नहीं बनाया जाता है) जिससे Pod काफी तेज़ गति से दौड़ता है.

  • North Pole और South Pole : अगर किसी दो चुंबक के समान पोल जैसे की North-North या फिर South-South पोल को अगर एक साथ लाया जाए तो वे चुंबक आपस में दूर भागेंगे, इसी कांसेप्ट का इस्तेमाल Hyperloop के Pod को हवा में रखने के लिए किया जाता है.

किसी भी Tube की लम्बाई 2000 किलोमीटर या इससे भी अधिक हो सकता है, यह निर्भर करता है की Hyperloop Tube किन दो शहरों या राज्यों को जोड़ता है. 

2. Pod 

Pod ट्रैन के एक डिब्बे जितना बड़ा होता है लेकिन इसकी गति काफी ज्यादा होती है यह पैसेंजर को 1200km/hr की रफ़्तार से उनके गंतव्य तक पहुंचा सकता है. Pod के अंदर उसकी क्षमता के अनुसार लोग बैठ सकते हैं, 28 से लेकर 40 लोग. जिस तरह हवाई जहाज में बैठने के लिए सीट होता है उसी तरह Hyperloop के इस Pod में भी सीट मौजूद होता है.

Pod के आगे और पीछे फैन लगे होते हैं जो की इसे ब्रेक लगाने में मदद करते हैं जब Pod आगे की तरफ दौड़ता है तब ये फैन सीधा घूमता है और जब Pod को रोकना होता है यही फैन उल्टा घूमने लगते है, अब क्यूंकि Pod और Tube के पटरी के बीच में सीधा संपर्क नहीं है इसलिए Pod को रोकने के लिए फैन का इस्तेमाल  किया जाता है.

3. Solar Panel 

यह Tube के ऊपर लगा होता है जो की Pod और Tube को Energy प्रदान करता है, अब क्यूंकि Pod को आगे धकेलने के लिए ज्यादा ऊर्जा की जरुरत नहीं पड़ती है इसलिए Solar Energy इसके लिए काफी होता है. दिन के समय Pod को Solar Panel से ऊर्जा दिया जाता है और रात के समय Pod को Battery से ऊर्जा दिया जाता है. 

Hyperloop Technology कैसे काम करता है? (How Hyperloop Technology Works in Hindi)

Hyperloop Technology चुम्बकीय शक्ति पर आधारित टेक्नोलॉजी है, इस टेक्नोलॉजी के मुख्य अंग है Tube और Pod. Tube खंभे के ऊपर बिछाया जाता है और Pod को उसी Tube के अंदर हवा में रखकर चलाया जाता है.

अब क्यूंकि Pod और Tube के बीच कोई संपर्क नहीं रहता है इसलिए Friction बल नहीं लगता है और Tube के अंदर से 90% हवा को बाहर निकाल लिया जाता है इसलिए Pod को Drag बल का सामना नहीं करना पड़ता है जिससे Pod काफी तेज़ गति से दौड़ता है.

Hyperloop Technology in Hindi

Pod को आगे धकेलने के लिए Linear Electric Motor का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन आप लोगों के मन यह सवाल भी होगा की Pod हवा में कैसे चल पाता है, तो चलिए इसका भी जवाब जान लेते हैं.

जैसा की मैंने पहले ही बताया है की Tube के अंदर जो पटरी बिछा हुआ रहता है वह चुम्बक का होता है और Pod के निचे का हिस्सा भी चुम्बक का बना होता है, Pod को हवा में ही रखने के लिए Pod के निचे के चुम्बक और Tube के पटरी के चुम्बक का पोल एक जैसा कर दिया जाता है जैसे की N-N या S-S. ऐसा करने से Pod हवा में ही रहता है, Friction और Drag बल ना होने के कारण Pod काफी तेज़ गति से चलता है.

भारत में Hyperloop (Hyperloop in India in Hindi)

पुणे के रहने वाले तनय मांजरेकर जो की Hyperloop के पावर इलेक्ट्रॉनिक स्पेशलिस्ट हैं, ये पहले भारतीय हैं जिन्होंने अमेरिका के लॉस वेगास शहर में Testing के दौरान Hyperloop के Pod में सफर किया है. भारत में Hyperloop के पहले प्रोजेक्ट का काम Virgin Hyperloop द्वारा शुरू किया जाएगा. 

Virgin Hyperloop जो की रिचर्ड ब्रैंसन की कंपनी है वह इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह सफल बनाना चाहतें और उनका कहना है की भारत में साल 2030 तक यह आम लोगों के लिए उपलब्ध हो जायेगा.

भारत में Virgin Hyperloop प्रोजेक्ट के लिए महाराष्ट्र राज्य के मुंबई-पुणे रूट को चुना गया है, मुंबई और पुणे के बीच के दूरी करीब 140 किलोमीटर है इस दूरी को ट्रैन से पूरा करने में 3 घंटे का समय लगता है लेकिन Hyperloop इस दूरी को महज 20 मिनट में पूरा कर देगा.   

इसके आलावा भी Virgin Hyperloop भारत के अन्य राज्यों में भी Hyperloop प्रोजेक्ट को शुरू करने का विचार कर रहा है. Virgin Hyperloop ने Hyperloop प्रोजेक्ट के लिए बैंगलोर एयरपोर्ट से पार्टनरशिप किया है और अब पंजाब सरकार से भी इस प्रोजेक्ट के बारे में वार्ता चल रही है.

Virgin Hyperloop vs Hyperloop One 

Virgin Hyperloop और Hyperloop One ये दोनों एक ही कंपनी है पहले इस कंपनी का नाम Hyperloop One था लेकिन अब इसका नाम Virgin Hyperloop One रख दिया गया है. निचे बताया गया है की किस साल में समय के साथ Hyperloop कंपनी का नाम बदला गया था. 

  • Hyperloop Technology (2014-2016)
  • Hyperloop One (2016-2017)
  • Virgin Hyperloop One (2017-2020)

फायदे और नुक्सान (Advantages and Disadvantages of Hyperloop in Hindi)

अब तक तो आप यह समझ ही गए हो की Hyperloop क्या है (What is Hyperloop in Hindi) और यह कैसे काम करता है (Hyperloop Kaise kaam Karta Hai) लेकिन आपको इसके नुक्सान और फायदे भी जानना जरुरी है.

Hyperloop के Advantages 

  • इस टेक्नोलॉजी में Transportation स्पीड हवाई जहाज से दोगुना होता है.
  • यह एनर्जी का इस्तेमाल काफी कम करता है.
  • ऊर्जा का कम इस्तेमाल होने के वजह से यह काफी सस्ता भी है.
  • इसपर ख़राब मौसम का कोई असर नहीं होता है. 
  • Transportation के लिए यह एक सुरक्षित साधन है. 
  • भूकंप का ज्यादा असर इसपर नहीं पड़ेगा. 

Hyperloop के Disadvantages 

  • इसकी तेज़ गति के कारण कुछ लोगों को चक्कर जैसा भी महसूस हो सकता है.
  • शुरू में इस टेक्नोलॉजी में काफी ज्यादा खर्चा आएगा. 
  • इसकी गति काफी तेज़ होगी और इस बीच में अगर इसमें कोई समस्या आएगा तो यह काफी खतरनाक साबित हो सकता है.
  • इसका रुट सीधा होना जरुरी है इसलिए रूट बनाते समय बीच में आने वाले पेड़ को काटना भी पद सकता है.
  • इसके Pod में लोगों के बैठने के लिए काफी कम जगह होता है. 

Conclusion:

हमें आशा है की यह आर्टिकल पढ़ने की बाद Hyperloop Technology से जुड़े सवालों के जवाब आपको मिल गए होंगे जैसे की Hyperloop टेक्नोलॉजी क्या है (What is Hyperloop Technology in Hindi), यह कैसे काम करता है और इसके फायदे और नुक्सान क्या हैं. यह टेक्नोलॉजी आने वाले समय में Transportation के सिस्टम को पूरी तरह बदल कर रख देगा. अगर आपको यह जानकरी अच्छा लगा तो इसे आप आप दोस्तों को भी शेयर करें. 

आप अपने विचार और सुझाव निचे कमेंट में लिखकर हमें बता सकते हैं.

Vikas Tiwari

विकास तिवारी इस ब्लॉग के मुख्य लेखक हैं. इन्होनें कम्प्यूटर साइंस से Engineering किया है और इन्हें Technology, Computer और Mobile के बारे में Knowledge शेयर करना काफी अच्छा लगता है.

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