क्या भारत में बिटकॉइन माइनिंग लाभदायक है? | Is Bitcoin Mining Profitable in India in Hindi?

क्या आप यह जनाना चाहते हैं की क्या भारत में बिटकॉइन माइनिंग लाभदायक है या नहीं तो इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें. 

बिटकॉइन माइनिंग क्या है?

जब पूरी दुनिया में कोई एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को बिटकॉइन भेजता है तब दुनिया भर के कंप्यूटर इस ट्रांसक्शन को पूरा करने में जुट जाते हैं और जो कंप्यूटर सबसे पहले ट्रांसक्शन को Validate करता है उसे उपहार के रूप में बिटकॉइन मिलता है और इसी प्रोसेस को बिटकॉइन माइनिंग कहा जाता है.

वैसे हिंदी में Mining का मतलब है “खोद कर निकालना” जब कोई कंप्यूटर किसी ट्रांसक्शन को validate करते रहता है इसे ही माइनिंग कहा जाता है.

हमें आशा है की आपको बिटकॉइन माइनिंग क्या है यह समझ में आ गया होगा, आप बिटकॉइन की माइनिंग करके बिटकॉइन कमा सकते हैं और उसे पैसे में बदल सकते हैं. तो चलिए अब जानते हैं की क्या भारत में बिटकॉइन माइनिंग लाभदायक है या नहीं. 

आपको बिटकॉइन माइनिंग (खनन भी कहा जाता है) करने के लिए मुख्यतः दो चीज़ों को आवश्यकता होगी. 

1) माइनिंग रिग 

2) बिजली 

बस आपको माइनिंग रिग खरीदना होगा और इसे बिजली से जोड़ देना होगा उसके बाद इसमें मौजूद एल्गोरिथ्म आपके लिए बिटकॉइन माइन करते रहेगा. 

भारत में, क्रिप्टोक्यूरेंसी पारिस्थितिकी तंत्र फलफूल रहा है लेकिन जब खनन की बात आती है, तो भारत पिछड़ा हुआ है. “एक क्रिप्टो-बाजार के रूप में, भारत उस तरह से आगे नहीं बढ़ा है जैसे अन्य देश नियामक अनिश्चितता के कारण सक्षम हैं. यह अभी भी एक बहुत ही प्रारंभिक अवस्था में है, ”भारतीय क्रिप्टोक्यूरेंसी एक्सचेंज वज़ीरएक्स के सह-संस्थापक निश्चल शेट्टी ने कहा.

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क्या भारत में बिटकॉइन माइनिंग लाभदायक है?

हाल के वर्षों में भारत में क्रिप्टोक्यूरेंसी खनन में तेजी आई है. ईज़ीफी नेटवर्क जैसी कंपनियां देश में खनन सुविधाएं और ब्लॉकचेन विकास प्रदान करती हैं. वज़ीरएक्स के शेट्टी का मानना ​​है कि देश के कुछ हिस्सों में छोटे पैमाने पर खनन कार्यों के कुछ अन्य क्षेत्र भी हो सकते हैं. हालांकि, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है.

क्रिप्टोक्यूरेंसी खनन और बिजली

चूंकि बिटकॉइन खनन एक ऊर्जा-गहन प्रक्रिया है, इसलिए भारत में ब्लॉकचैन पूल स्थापित करना कठिन और महंगा हो सकता है. भारत में, बिजली की वार्षिक लागत औसतन रु. 5.20-8.20 प्रति किलोवाट-घंटे के बीच होती है, जबकि कजाकिस्तान की तुलना में इसकी लागत 4-5 सेंट/kWh है.

कैम्ब्रिज बिटकॉइन इलेक्ट्रिसिटी कंजम्पशन इंडेक्स के एक अनुमान के अनुसार, क्रिप्टोक्यूरेंसी माइनिंग में साल में लगभग 67.29 टेरावाट/घंटे की खपत होती है. 10 मई को, बिटकॉइन खनन के लिए बिजली की वैश्विक खपत पहली बार 141.28 टेरावाट/घंटे पर पहुंच गई.

वज़ीरएक्स के शेट्टी ने कहा, “बिजली की लागत के कारण भारत में खनन लाभदायक नहीं हो सकता है” “यदि आप सौर पैनलों जैसे ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों में आते हैं, तो यह लागत प्रभावी हो सकता है.”

शेट्टी का मानना ​​​​है कि सब्सिडी के रूप में खनिकों को प्रोत्साहित करना भारत में एक क्रिप्टोक्यूरेंसी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने का एक तरीका हो सकता है.

Vikas Tiwari

विकास तिवारी इस ब्लॉग के मुख्य लेखक हैं. इन्होनें कम्प्यूटर साइंस से Engineering किया है और इन्हें Technology, Computer और Mobile के बारे में Knowledge शेयर करना काफी अच्छा लगता है.

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